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ईडी की कार्रवाई के बाद बड़ा सियासी झटका, 21 जुलाई से पहले बंगाल की राजनीति में हलचल
पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। कभी “ओ लवली” अंदाज और ममता बनर्जी के सबसे रंगीन और चर्चित नेताओं में गिने जाने वाले मदन मित्र ने तृणमूल कांग्रेस का साथ छोड़कर ऋतब्रत के नेतृत्व वाले नए राजनीतिक शिविर का दामन थाम लिया है।
भवानीपुर से अपनी राजनीतिक पहचान बनाने वाले और कभी यूथ कांग्रेस से लेकर तृणमूल कांग्रेस तक ममता बनर्जी के भरोसेमंद सहयोगी रहे मदन मित्र का यह फैसला राजनीतिक गलियारों में बड़ी चर्चा का विषय बन गया है। बताया जा रहा है कि उनकी पत्नी और बेटे को ईडी के समन मिलने के बाद राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदला।
21 जुलाई के कार्यक्रम से ठीक पहले, जब ब्रिगेड में सभा को लेकर अदालत में सुनवाई चल रही है, उसी समय मदन मित्र का दल बदलना तृणमूल के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। बंगाल की राजनीति में इसे एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि इस घटनाक्रम और इसके कारणों को लेकर आधिकारिक पुष्टि तथा संबंधित पक्षों के बयान सामने आने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सकता है।





