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गंगासागर मेले में पुण्य स्नान के लिये पहुँचे नागा साधुओं श्रद्धांलुओं का खिंचा ध्यान

साउथ 24 परगना, राख से सने शरीर, हाथों में त्रिशूल डमरू, उलझे बाल—
यात्री सिर्फ़ उनकी एक झलक पाने के लिए इकट्ठा हो रहे हैं।” “ठंड बहुत है, हवा ठंडी है— फिर भी नागा साधु अपने नंगे शरीर में मग्न हैं। उनके अनुसार, शरीर असली नहीं है, आत्मा है।”“नागा साधु अपनी दुनिया, परिवार, सामाजिक रिश्ते—सब कुछ छोड़कर खुद को ईश्वर के ध्यान में लगा देते हैं। नागा साधू मोक्ष की तलाश में दुनिया की मोह माया से अलग हो चुके हैं। उन्हे शरीर ढकने की कोई ज़रूरत नहीं है, क्योंकि उनके अनुसार शर्म, डर—सब भ्रम हैं। “दिन-ब-दिन उपवास करना, आग के सामने ध्यान करना, कभी-कभी एक पैर पर खड़ा होना— ये सब नागा साधुओं के रोज़ की एक रूटिंग है,
उनके अनुसार “गंगा सिर्फ़ तीर्थस्थल नहीं है, नागा साधुओं के लिए यह ऊर्जा जमा करने का सेंटर भी है।
लाखों लोगों की भीड़ को संभालने के लिए एडमिनिस्ट्रेशन ने कड़े सिक्योरिटी इंतज़ाम किए हैं।
नागा साधुओं के लिए अलग अखाड़ा,
अलग सिक्योरिटी ज़ोन।
नागा साधुओं के आने-जाने और प्रैक्टिस के लिए खास इंतज़ाम किए गए हैं। कुछ अखाड़ा छोड़कर नंगे बदन श्रद्धालुओं के पास पहुँचते हैं, तो कुछ श्रद्धालुओं पर चिल्लाते हैं। नागाओं की एक झलक पाने के लिए लोगों का जोश मेले मे साफ़ देखा जा सकता है।” “आज की दुनिया में भी, नागा साधु पुराने भारत के जीते-जागते इतिहास की तरह हैं। गंगा नदी की पवित्र धरती पर उनकी मौजूदगी आज भी लोगों के मन में त्याग, तपस्या और खुद को जानने के सवाल को जगाती है।” “जैसे गंगा नदी में नहाना खुद को शुद्ध करने का प्रतीक है, वैसे ही नागा साधु त्याग के सबसे बड़े प्रतीक हैं। नागा साधुओं के रंगीन नाम जिन्होंने ज़्यादातर श्रद्धालुओं के मन में जगह बनाई है, वे हैं नंबर बाबा, DJ बाबा, लाइटिंग बाबा, वगैरह!

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