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आसनसोल में निजी होटल के साइनबोर्ड पर इस्तेमाल किया गया भाजपा का चुनाव चिह्न, विरोध प्रदर्शन से गरमाया इलाका

নির্ভীক বাংলা নিউজ ডেস্ক
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29 सितंबर 2026 को 05:08 pm बजे
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आसनसोल में निजी होटल के साइनबोर्ड पर इस्तेमाल किया गया भाजपा का चुनाव चिह्न, विरोध प्रदर्शन से गरमाया इलाका
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आसनसोल, 29 सितंबर: व्यावसायिक प्रतिष्ठान में राजनीतिक दल के चुनाव चिह्न के इस्तेमाल को लेकर आसनसोल दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के फतेपुर इलाके में भारी हंगामा मच गया। जीटी रोड से लगे फतेपुर के पुराने और जाने-माने 'कमल होटल' के बोर्ड पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आधिकारिक 'कमल' चुनाव चिह्न का इस्तेमाल किए जाने को लेकर मंगलवार को पूरे दिन व्यापक तनाव बना रहा। इस घटना के विरोध में स्थानीय भाजपा नेतृत्व और कार्यकर्ता होटल परिसर में पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया। उनकी स्पष्ट मांग थी कि व्यावसायिक लाभ उठाने या किसी अन्य उद्देश्य के लिए किसी राजनीतिक दल के चुनाव चिह्न या नाम का इस्तेमाल करना अनैतिक और अवैध है। इसके साथ ही, प्रदर्शनकारियों ने इस विवादित चिह्न को तुरंत हटाने की मांग को लेकर आवाज उठाई।

स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, फतेपुर इलाके में कमल होटल लंबे समय से संचालित हो रहा है। हालांकि, हाल ही में होटल प्रबंधन की ओर से मुख्य साइनबोर्ड और परिसर की कई जगहों पर भाजपा का चुनाव चिह्न 'कमल' पेंट और प्रिंट करवाया गया था। जैसे ही यह बात राहगीरों और स्थानीय पार्टी कार्यकर्ताओं की नजर में आई, वैसे ही विरोध की आंधी उठ खड़ी हुई। यह सवाल उठने लगा कि एक निजी व्यावसायिक प्रतिष्ठान किस हक से और किसकी अनुमति से किसी राष्ट्रीय दल के चुनाव चिह्न का इस्तेमाल कर रहा है। मंगलवार सुबह ही जीटी रोड के पास स्थित उस होटल परिसर में गुस्सा फूट पड़ा।

मंगलवार को स्थानीय भाजपा नेता बिरजू यादव के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों का एक दल फतेपुर के उस होटल में पहुंचा और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। चुनाव चिह्न के इस्तेमाल के कानूनी और नैतिक आधार पर सवाल उठाते हुए प्रदर्शनकारियों ने होटल प्रबंधन का सामना किया। इसके बाद तीखी नोकझोंक और लंबी बातचीत शुरू हुई। प्रदर्शनकारी इस बात पर अड़े रहे कि पार्टी के चुनाव चिह्न का इस्तेमाल किसी भी व्यावसायिक हित के लिए नहीं करने दिया जाएगा। जब स्थिति तनावपूर्ण हो गई, तो एक समय ऐसा आया जब प्रदर्शनकारियों की मौजूदगी में ही साइनबोर्ड पर बने कमल के चुनाव चिह्न को कपड़े और कागज से ढक दिया गया।

इस घटना के बाद बैकफुट पर आए कमल होटल के मालिक कमल माजी ने कहा कि विवाद से बचने और स्थिति को शांत रखने के लिए होटल परिसर में लगाए गए सभी राजनीतिक चुनाव चिह्नों को बुधवार तक पूरी तरह से हटा दिया जाएगा। हालांकि, होटल मालिक की ओर से इस बात का कोई स्पष्ट स्पष्टीकरण नहीं मिल पाया है कि आखिर किस उद्देश्य से और किसकी शह पर होटल में भाजपा का चुनाव चिह्न लगाया गया था। 'कमल' नाम के साथ 'कमल' चुनाव चिह्न को जोड़ने की कोशिश थी या इसके पीछे कोई राजनीतिक सुरक्षा कवच पाने का उद्देश्य था—इसको लेकर संशय बना हुआ है।

इस घटना को लेकर न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि भाजपा के अंदरूनी हलकों में भी तीखी प्रतिक्रिया और चर्चा छिड़ गई है। पार्टी की अनुमति के बिना चुनाव चिह्न के इस्तेमाल के कानूनी पहलुओं को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं। आसनसोल सांगठनिक जिले के भाजपा महासचिव प्रशांत चक्रवर्ती ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा, "पार्टी के चुनाव चिह्न के इस्तेमाल को लेकर कुछ खास नियम और अनुशासन हैं। पार्टी के उच्च अधिकारियों की लिखित अनुमति के बिना कोई भी व्यावसायिक प्रतिष्ठान या व्यक्ति भाजपा के चुनाव चिह्न का उपयोग नहीं कर सकता है। फतेपुर की घटना के पीछे क्या कारण है, इसकी गंभीरता से जांच की जा रही है।"

जिला महासचिव प्रशांत चक्रवर्ती ने आगे कहा, "किसी संस्थान का नाम 'कमल' हो सकता है या वह कमल का पर्यायवाची हो सकता है, लेकिन वहां भाजपा के रजिस्टर्ड चुनाव चिह्न का सीधे तौर पर इस्तेमाल करना बिल्कुल अलग मामला है। पार्टी की ओर से इस संबंध में विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है। यदि यह पाया जाता है कि पार्टी के किसी भी स्तर की अनुमति के बिना यह काम किया गया है, तो कानूनी और आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।"

पश्चिम बर्द्धमान जिले के औद्योगिक क्षेत्र आसनसोल में हुई इस घटना को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में काफी चर्चा शुरू हो गई है। एक तरफ जहां व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में राजनीतिक प्रतीकों के दुरुपयोग पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं अन्य राजनीतिक दल भी पूरे मामले पर उत्सुकता दिखा रहे हैं। राज्य के बदलते राजनीतिक परिदृश्य के बीच आसनसोल की इस घटना के पीछे पार्टी के भीतर की कोई अंदरूनी कलnh है या व्यावसायिक लाभ हासिल करने की कोई रणनीति, इसे लेकर तेज अटकलें लगाई जा रही हैं। फिलहाल होटल मालिक द्वारा चुनाव चिह्न हटाए जाने के आश्वासन से स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन पार्टी की अनुमति का सवाल आसनसोल की राजनीति में एक नए विवाद को जन्म दे चुका है।

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প্রধান সম্পাদক ও প্রকাশক, নির্ভীক বাংলা।

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