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चलती कार में वजन और पैसे का खेल! आसनसोल-धनबाद ड्रग रैकेट का भंडाफोड़

নির্ভীক বাংলা নিউজ ডেস্ক
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6 सितंबर 2026 को 02:15 pm बजे
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चलती कार में वजन और पैसे का खेल! आसनसोल-धनबाद ड्रग रैकेट का भंडाफोड़
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https://youtube.com/shorts/ijQxADWDAY4?si=xBoWKxnCgozIIiddविशेष संवाददाता, निर्भीक বাংলা (आसनसोल): पश्चिम बंगाल के प्रमुख औद्योगिक और कोयलांचल शहर आसनसोल में मादक पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट (ADPC) ने अपना शिकंजा पूरी तरह से कसना शुरू कर दिया है। पुलिस की इस कठोर और ताबड़तोड़ कार्रवाई के बीच पड़ोसी राज्य झारखंड के धनबाद से जुड़े एक सनसनीखेज वीडियो ने पूरे इलाके में कोहराम मचा दिया है। सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म्स पर तेजी से वायरल हो रहे इस वीडियो में एक चलती हुई कार के भीतर कथित तौर पर अवैध ब्राउन शुगर की तौल और भारी मात्रा में पैसों का संदिग्ध लेनदेन होते हुए साफ तौर पर देखा जा सकता है। इस वीडियो के सामने आने के बाद न केवल आसनसोल बल्कि पूरे सीमावर्ती इलाके में हड़कंप मच गया है, और पुलिस तथा खुफिया एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं। इस हाई-प्रोफाइल मामले की तहकीकात अब बेहद बारीकी और गोपनीयता के साथ की जा रही है, ताकि इस अंतरराज्यीय ड्रग्स रैकेट के हर एक मोहरे को बेनकाब किया जा सके।

वायरल वीडियो की पृष्ठभूमि और झारखंड कनेक्शन:

प्रारंभिक छानबीन और तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, सोशल मीडिया पर जंगल में आग की तरह फैल रहा यह वीडियो झारखंड के धनबाद जिले के कुमारडूबी क्षेत्र से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। वीडियो में नजर आ रहे मुख्य व्यक्तियों में से एक की शिनाख्त कुमारडूबी के सिलिबाड़ी इलाके के रहने वाले मोहम्मद मुख्तार के रूप में की जा रही है। हालांकि, 'निर्भीक বাংলা' इस वायरल वीडियो की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि नहीं करता है। आपराधिक मामलों के जानकारों और पुलिस सूत्रों का मानना है कि यह वीडियो मुख्य तस्करों की पुलिस द्वारा की गई गिरफ्तारी से ठीक कुछ दिन या घंटे पहले का है, जिसे गिरोह के ही किसी असंतुष्ट सदस्य, आपसी रंजिश के चलते किसी अन्य व्यक्ति या फिर कार में ही मौजूद किसी शख्स द्वारा अपने मोबाइल कैमरे में चुपचाप कैद कर लिया गया था। बाद में यह वीडियो असामाजिक तत्वों या अन्य माध्यमों से सोशल मीडिया पर लीक हो गया, जो अब पुलिस के लिए भी एक अहम सुराग बन गया है।

कार के भीतर इलेक्ट्रॉनिक तराजू से खेल:

वायरल फुटेज की गहराई से जांच करने पर साफ तौर पर देखा जा सकता है कि किस प्रकार एक चार पहिया वाहन के अंदर कुछ लोग बेखौफ होकर बैठे हुए हैं। उनके पास एक छोटा पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक तराजू रखा हुआ है, जिस पर संदिग्ध मादक पदार्थ (संभवतः उच्च गुणवत्ता वाली ब्राउन शुगर) की छोटी-छोटी पुड़िया रखकर उसका सटीक वजन किया जा रहा है। इसके साथ ही, कैमरे में काले कारोबार से जुड़ी भारी मात्रा में कैश गिनने और पैसों के आदान-प्रदान के दृश्य भी कैद हुए हैं। इस वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद से ही आसनसोल और झारखंड के सीमावर्ती इलाकों के आम नागरिकों में गहरी चिंता और हैरानी का माहौल है। लोग इस बात से स्तब्ध हैं कि किस दुस्साहस और बेखौफ अंदाज में अपराधी चलती गाड़ियों और सार्वजनिक मार्गों पर खुलेआम ड्रग्स का यह काला कारोबार संचालित कर रहे थे, मानों उन्हें कानून का कोई खौफ ही न बचा हो।

30 अगस्त की रात: आसनसोल में 600 ग्राम ब्राउन शुगर की बड़ी खेप बरामद:

यह पूरा सनसनीखेज मामला तब खुलकर प्रकाश में आया जब आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट के डिटेक्टिव डिपार्टमेंट (DD) को एक बेहद पुख्ता और विश्वसनीय खुफिया सूचना मिली थी। कमिश्नरेट के खुफिया तंत्र को जानकारी मिली थी कि इलाके में मादक पदार्थों की एक बहुत बड़ी खेप की आपूर्ति होने वाली है। इस विशिष्ट सूचना पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करते हुए 30 अगस्त 2026 की देर रात डीडी की एक विशेष टीम ने आसनसोल उत्तर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले लालगंज-जुबिली रोड स्थित राय मैदान के पास रणनीतिक रूप से घेराबंदी कर एक संदिग्ध मारुति सुजुकी एर्टिगा कार को रोक लिया।

पुलिस की टीम द्वारा जब उस वाहन की सघन और तकनीकी तलाशी ली गई, तो अधिकारियों के भी होश उड़ गए। कार के अंदर से लगभग 600 ग्राम से अधिक भारी मात्रा में उच्च गुणवत्ता की ब्राउन शुगर बरामद की गई, जिसकी काले बाजार में अनुमानित कीमत लाखों-करोड़ों रुपये आंकी जा रही है। पुलिस ने एनडीपीएस (NDPS) अधिनियम की प्रासंगिक और गंभीर धाराओं के तहत तुरंत मामला दर्ज किया और कार में सवार दो संदिग्धों को मौके से ही धर दबोचा। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से एक की पहचान मोहम्मद दानिश के रूप में हुई, जो मूल रूप से झारखंड के धनबाद जिले के कुमारडूबी (सिलिबाड़ी) का ही रहने वाला बताया गया।

महज तीन दिन बाद मास्टरमाइंड पिता भी गिरफ्तार:

पुलिस की गिरफ्त में आए आरोपियों से हिरासत में की गई कड़ाई से पूछताछ और उनके द्वारा दिए गए बयानों के आधार पर डिटेक्टिव डिपार्टमेंट ने अपनी इस कार्रवाई का दायरा और अधिक बढ़ा दिया। पहली बड़ी सफलता मिलने के महज तीन दिन बाद, यानी 3 सितंबर 2026 को पुलिस ने एक और अत्यंत सफल और सुनियोजित ऑपरेशन को अंजाम दिया। ADPC के डिटेक्टिव डिपार्टमेंट ने आसनसोल बस स्टैंड के पास स्थित ऐतिहासिक ओल्ड डुरंड सिनेमा हॉल के समीप एक और जाल बिछाकर इस सिंडिकेट के एक अन्य अहम आरोपी को धर दबोचा।

गिरफ्तार किए गए इस दूसरे व्यक्ति के पास से भी पुलिस ने लगभग 300 ग्राम और अतिरिक्त ब्राउन शुगर बरामद की। जब पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की, तो इस आरोपी की पहचान मोहम्मद मुख्तार के रूप में हुई। यह वही शख्स था जिसे कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुए कार के भीतर के वीडियो में साफ तौर पर देखा गया था। इस गिरफ्तारी का सबसे चौकाने वाला और सनसनीखेज पहलू यह था कि मोहम्मद मुख्तार कोई और नहीं, बल्कि इसके ठीक तीन दिन पहले 600 ग्राम ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपी मोहम्मद दानिश का अपना पिता है। पिता और पुत्र दोनों के इस प्रकार सिलसिलेवार ढंग से पुलिस के शिकंजे में आने से यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया कि आसनसोल और धनबाद के बीच एक बेहद संगठित, सुनियोजित और अंतरराज्यीय ड्रग सिंडिकेट लंबे समय से सक्रिय था।

बढ़ता दायरा और अनसुलझे सवाल:

पिता और पुत्र की इन अलग-अलग और ताबड़तोड़ गिरफ्तारियों ने पुलिस और जांच एजेंसियों के सामने कई नए, गंभीर और बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्तमान में जांच अधिकारियों के समक्ष सबसे बड़ी और मुख्य चुनौती इस ड्रग्स सप्लाई चेन की जड़ तक पहुंचना और इसके पूरे नेटवर्क को नेस्तनाबूद करना है। पुलिस अब निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं की गहराई से पड़ताल करने में जुटी है:

1. यह भारी मात्रा में अवैध ब्राउन शुगर आखिर किस मुख्य स्रोत, ड्रग्स लॉर्ड या अंतरराज्यीय माफिया से खरीदी जा रही थी?

2. झारखंड के कुमारडूबी से आसनसोल और आसपास के इलाकों तक इस जानलेवा खेप को सुरक्षित रूप से पहुंचाने के लिए किन-किन सुरक्षित रास्तों, तस्करों और वाहनों का इस्तेमाल किया जाता था?

3. इस अवैध और काले नेटवर्क में पश्चिम बंगाल और झारखंड के अन्य किन-किन स्थानीय तस्करों, छोटे-बड़े पैडलर्स या पर्दे के पीछे छिपे रसूखदार लोगों की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संलिप्तता है?

4. क्या इस संगठित सिंडिकेट के तार देश के अन्य महानगरों, पड़ोसी राज्यों या नेपाल-बांग्लादेश की सीमाओं से भी जुड़े हुए हैं?

वायरल वीडियो बन सकता है ठोस सबूत:

मामले की जांच कर रहे वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा यह वीडियो उनके लिए अभियोजन पक्ष की तरफ से एक बेहद अहम और अचूक डिजिटल सबूत साबित हो सकता है। यदि फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) की जांच में इस वायरल वीडियो की सत्यता प्रमाणित हो जाती है और इसमें दिख रहे चेहरों और गतिविधियों की कानूनी पुष्टि हो जाती है, तो अदालत में इन शातिर आरोपियों के खिलाफ एक अकाट्य और पुख्ता मामला तैयार करने में यह वीडियो फुटेज एक मील का पत्थर साबित होगी। हालांकि, पुलिस जल्दबाजी दिखाने के बजाय सभी कानूनी औपचारिकताओं, दस्तावेजी साक्ष्यों और वैज्ञानिक प्रमाणों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है, ताकि अदालत में सुनवाई के दौरान आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके और वे किसी भी कानूनी loopholes का फायदा उठाकर बच न सकें।

ड्रग्स के खिलाफ आर-पार की लड़ाई:

आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट के शीर्ष अधिकारियों का दो टूक कहना है कि युवा पीढ़ी को बर्बादी से बचाने और पूरे शहर को पूरी तरह से नशा मुक्त बनाने के लिए उनका यह विशेष अभियान भविष्य में भी इसी सख्ती के साथ लगातार जारी रहेगा। पुलिस अब केवल निचले स्तर के छोटे पैडलर्स या वाहकों तक अपनी कार्रवाई सीमित न रखकर, इस अवैध और काले कारोबार के असली वित्तपोषकों (Financiers), संरक्षकों और मास्टरमाइंड्स तक शिकंजा कसने का प्रयास कर रही है। 'निर्भीक বাংলা' अपने सम्मानित पाठकों को पूरी तरह आश्वस्त करता है कि इस सनसनीखेज और बड़े मामले से जुड़े हर नए अपडेट, खुलासे और पुलिस कार्रवाई की सटीक और निष्पक्ष जानकारी हम आगे भी सबसे पहले लाते रहेंगे। फिलहाल, गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी पुलिस रिमांड पर हैं और पुलिस व खुफिया विभागों की संयुक्त टीम द्वारा उनसे बेहद गोपनीय और गहन पूछताछ का दौर जारी है।

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প্রধান সম্পাদক ও প্রকাশক, নির্ভীক বাংলা।

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