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विधानसभा चुनाव से पहले गरमाई बंगाल की सियासत, आशा कर्मियों के बाद अब सफाई कर्मियों ने भी खोला ममता सरकार के खिलाफ मोर्चा तेज हुई हक़ की आंदोलन.

.. आसनसोल, पश्चिम बंगाल में कुछ ही महीनों बाद 2026 का विधानसभा चुनाव होने वाला है। चुनाव को लेकर राज्य की सभी राजनीतिक पार्टियाँ पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर चुकी हैं। एक ओर सत...

Abdul Haque
Abdul Haque
6 जून 2026 को 09:36 am बजे
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विधानसभा चुनाव से पहले गरमाई बंगाल की सियासत, आशा कर्मियों के बाद अब सफाई कर्मियों ने भी खोला ममता सरकार के खिलाफ मोर्चा तेज हुई हक़ की आंदोलन.
.. आसनसोल, पश्चिम बंगाल में कुछ ही महीनों बाद 2026 का विधानसभा चुनाव होने वाला है। चुनाव को लेकर राज्य की सभी राजनीतिक — विस्तृत समाचार पढ़ें निर्भीक बांग्ला पर।|निर्भीक बांग्ला फोटो
.. आसनसोल, पश्चिम बंगाल में कुछ ही महीनों बाद 2026 का विधानसभा चुनाव होने वाला है। चुनाव को लेकर राज्य की सभी राजनीतिक पार्टियाँ पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर चुकी हैं। एक ओर सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस अपनी विभिन्न योजनाओं को सामने रखकर भाजपा को चुनौती दे रही है, वहीं भाजपा कोयला, बालू, पत्थर, गाय, शिक्षा सहित कई कथित घोटालों और भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर सरकार पर हमला बोल रही है। भाजपा का दावा है कि राज्य की जनता को केंद्र की योजनाओं से वंचित रखा गया और बांग्लादेशी घुसपैठियों के वोट के सहारे तृणमूल चुनाव जीतती रही है। इसी बीच आशा कर्मियों और सफाई कर्मियों के आंदोलन ने राज्य सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आशा कर्मी महिलाएं और सफाई कर्मी वेतन बढ़ोतरी, पीएफ, ईएसआई सुविधा और उन्हें कैजुअल स्टाफ का दर्जा देने की मांग को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं। चुनावी माहौल में यह आंदोलन ममता सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। हाल ही में पेश हुए राज्य बजट में आशा कर्मियों के वेतन में करीब एक हजार रुपये की बढ़ोतरी की गई, लेकिन सफाई कर्मियों की कोई भी मांग पूरी नहीं की गई। निगम प्रशासन का कहना है कि कॉरपोरेशन की आर्थिक स्थिति खराब है और अगले दो वर्षों तक वेतन बढ़ोतरी पर बात संभव नहीं है, हालांकि अन्य मांगों पर विचार किया जा सकता है। पिछले कई दिनों से आसनसोल में सफाई कार्य ठप पड़ा है, जिसके कारण शहर के कई इलाकों में कूड़े के ढेर लग गए हैं। चारों ओर गंदगी और बदबू से लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है। इस आंदोलन को लेकर अब विपक्षी दल भी सक्रिय हो गए हैं। सीपीएम, कांग्रेस और भाजपा ने इस मुद्दे को लेकर सड़कों पर उतरना शुरू कर दिया है। कहीं विपक्षी कार्यकर्ता सड़कों पर जमा कचरा साफ कर सरकार पर निशाना साध रहे हैं, तो कहीं आसनसोल नगर निगम का घेराव कर मांगों को मनवाने की कोशिश की जा रही है। विपक्ष इस मुद्दे को चुनावी हथियार के रूप में भी पेश करने की तैयारी में है, ताकि जनता का समर्थन हासिल किया जा सके।

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প্রধান সম্পাদক ও প্রকাশক, নির্ভীক বাংলা।

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