श्याम दास, आसनसोल: त्योहार की खुशियों के बीच गहरी चिंता की छाया मंडरा गई है। महासप्तमी की शाम कोलकाता के पारंपरिक चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में एक दर्दनाक हादसे में 19 दर्शनार्थियों की जान चली गई। इस भयानक हादसे के बाद पूजा पंडालों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पूरे राज्य में भारी हड़कंप मच गया है। उस दुखद घटना से सबक लेते हुए, स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने औद्योगिक शहर आसनसोल में पूजा पंडालों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अभूतपूर्व और कड़े कदम उठाए हैं। त्योहार के शेष दिनों में किसी भी अप्रिय घटना या सुरक्षा में चूक की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए पूरे शहर में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।
रविवार सुबह से ही आसनसोल शहर के हर बड़े बजट वाले और अत्यधिक भीड़भाड़ वाले पूजा पंडालों का प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों के उच्च स्तरीय दल ने निरीक्षण शुरू कर दिया। आसनसोल के उप-विभागीय अधिकारी (एसडीओ सदर) साधन देबनाथ और आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट के वरिष्ठ अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए बर्नपुर रोड स्थित प्रसिद्ध रवींद्र नगर उन्नयन समिति सहित कई प्रमुख पूजा पंडालों का खुद दौरा किया। इस निरीक्षण के दौरान आसनसोल उत्तर के विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी भी उनके साथ मौजूद थे।
निरीक्षण के दौरान, अधिकारियों ने बारीकी से जांच की कि पंडालों के प्रवेश और निकास द्वार पर्याप्त रूप से चौड़े हैं या नहीं और किसी भी आपातकालीन स्थिति में दर्शनार्थियों को तेजी से बाहर निकालने के लिए निर्दिष्ट 'इमरजेंसी एग्जिट' (आपातकालीन निकास) हैं या नहीं। इसके अलावा, पूजा आयोजकों को भीड़ नियंत्रण के लिए पर्याप्त प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की तैनाती, निर्बाध बिजली आपूर्ति, शॉर्ट सर्किट से बचाव के लिए विद्युत सुरक्षा, सीसीटीवी निगरानी और अग्निशमन उपकरणों के सुचारू संचालन के संबंध में कड़े निर्देश जारी किए गए। किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए पंडाल परिसर में पर्याप्त पुलिस पिकेट और मेडिकल हेल्पडेस्क स्थापित करने पर भी जोर दिया गया।
विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी ने कोलकाता के चोरबागान में हुई दर्दनाक दुर्घटना में 19 लोगों की मौत पर गहरा शोक और चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, "त्योहार के दिनों में लोगों की ऐसी दर्दनाक नियति बेहद हृदयविदारक है। उत्सव के इस समय में ऐसी घटना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। शायद सभी दुर्घटनाओं को पहले से पूरी तरह नहीं रोका जा सकता, लेकिन उचित सावधानी, सही योजना और नीतिगत स्तर के सुरक्षा उपायों को अपनाकर खतरे के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।"
उन्होंने आगे कहा, "कोलकाता की दुखद घटना के बाद आसनसोल के प्रत्येक पूजा पंडाल की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। रविवार सुबह से ही प्रशासनिक स्तर पर चरणबद्ध तरीके से बैठकें और निरीक्षण किए जा रहे हैं। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि पंडालों में पर्याप्त स्वयंसेवक मौजूद रहें और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारी हो। जो हुआ वह अत्यंत दुखद है, लेकिन हम आसनसोल में ऐसी किसी भी घटना की पुनरावृत्ति नहीं होने देंगे। प्रशासन पूरी तरह से तैयार और सतर्क है।"
कोलकाता कांड के बाद पूजा पंडालों में सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण में कमियों ने पूरे राज्य में बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में प्रशासन यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है कि आसनसोल में दर्शनार्थी पूरी मानसिक शांति, सुरक्षा और आनंद के साथ प्रतिमाओं के दर्शन कर सकें। आसनसोल के उप-विभागीय अधिकारी (सदर) साधन देबनाथ ने कहा, "हमने शहर के हर बड़े पंडाल का निरीक्षण किया है और समग्र व्यवस्थाओं की समीक्षा की है। जहां कहीं भी जरा सी भी त्रुटि या खामी नजर आई, उसे सुधारने के लिए पूजा कमेटी को तुरंत कड़े निर्देश और चेतावनी जारी की गई। दर्शनार्थियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।"

