श्याम दास, आसनसोल: आसनसोल नगर निगम के वार्ड नंबर 26 में कई आईसीडीएस या आंगनबाड़ी केंद्रों की जर्जर स्थिति को लेकर स्थानीय इलाके में तीव्र असंतोष फैल गया है। विशेष रूप से आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 157, 155 और 107 की सेवाओं को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। यह आरोप लगाया गया है कि क्षेत्र के बच्चों को सरकार द्वारा आवंटित पौष्टिक खाद्य पदार्थों और अन्य सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है। अस्वस्थकर माहौल और सरकारी दिशानिर्देशों के उल्लंघन के गंभीर आरोप सामने आने के बाद बच्चों के पोषण और सुरक्षा को लेकर एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है।
स्थानीय सूत्रों से प्राप्त समाचार के अनुसार, आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 155 का माहौल अत्यंत अस्वच्छ है। बच्चों का दोपहर का भोजन खुली नालियों और बिखरे हुए कचरे के ठीक बगल में पकाया जा रहा है, जो बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। इस खबर के मिलने पर, एक भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने केंद्र संख्या 157 का दौरा किया और इस कुप्रबंधन को लेकर केंद्र की पर्यवेक्षक रेखा चक्रवर्ती से जवाब मांगा। उस समय रसोई की प्रभारी एक महिला ने सनसनीखेज जानकारी दी कि निर्धारित नियमों के अनुसार उस दिन बच्चों के लिए भोजन की कोई उचित व्यवस्था नहीं की गई थी।
दूसरी ओर, केंद्र संख्या 107 की तस्वीर और भी निराशाजनक है। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि न तो प्रभारी पर्यवेक्षक और न ही केंद्र में एक भी बच्चा उपस्थित था। फिर भी रसोई खुली थी और खाना पक रहा था! स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि 30 पंजीकृत बच्चों के लिए केवल 10 उबले अंडे आवंटित किए गए थे, जो आवश्यकता की तुलना में अत्यंत अपर्याप्त है। इतना ही नहीं, स्थानीय निवासियों के एक वर्ग ने यह भी आरोप लगाया कि बच्चों के लिए सरकार द्वारा भेजे गए चावल, दाल और अन्य राशन सामग्री को पकाने के बजाय काले बाजार में बेचा जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष सच्चाई का अभी सत्यापन नहीं किया जा सका है।
भाजपा जिला सचिव बेबी रॉय इस समग्र स्थिति की जांच करने और भ्रष्टाचार के आरोपों की सच्चाई का सत्यापन करने के लिए मौके पर गईं। उन्होंने खुद स्थिति का जायजा लिया और आक्रोश व्यक्त किया। विभिन्न हलकों ने सवाल उठाया है कि मासूम बच्चों के पोषण जैसे बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दे पर राज्य सरकार और प्रशासन की निगरानी इतनी ढीली क्यों है। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने इस घटना की तत्काल उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। आरोप सही साबित होने पर संबंधित दोषी व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की भी पुरजोर मांग की गई है।

