खाली पदों पर शीघ्र भर्ती, कार्यभार में कमी, अदालत के बुनियादी ढांचे के विकास और न्याय के त्वरित निस्तारण की मांग को लेकर बांकुड़ा जिला अदालत के कर्मचारियों ने राज्य के अन्य जिलों की तरह लगातार दूसरे दिन भी पूर्ण कार्य बहिष्कार किया। इस लगातार कार्य बहिष्कार के कारण, इस दिन भी बांकुड़ा जिला अदालत की सभी न्यायिक गतिविधियां लगभग ठप रहीं, जिससे दूर-दूर से आए आम वादकारियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। राज्य भर में अदालत के कर्मचारियों के इस संयुक्त आंदोलन के दूसरे और अंतिम दिन स्थिति और अधिक गंभीर हो गई।
आंदोलनरत अदालत के कर्मचारियों की मुख्य शिकायत यह है कि राज्य की विभिन्न अदालतों में नए कर्मचारियों की भर्ती लंबे समय से पूरी तरह से बंद है। इसके साथ ही, जैसे-जैसे कर्मचारी नियमित रूप से सेवानिवृत्त हो रहे हैं, वर्तमान में हर अदालत में कर्मचारियों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। मौजूदा परिस्थितियों में यह देखा जा रहा है कि तीन लोगों के बजाय केवल एक ही कर्मचारी को काम के पहाड़ को संभालना पड़ रहा है। परिणामस्वरूप, अत्यधिक कार्यभार के मानसिक और शारीरिक तनाव के कारण अदालत के कर्मचारियों की समझ में नहीं आ रहा है कि वे क्या करें। अतिरिक्त काम के इस तीव्र दबाव के अलावा, चूंकि अदालतों का बुनियादी ढांचा विकास लंबे समय से ठप पड़ा है, इसलिए उन्हें हर दिन विभिन्न जटिल समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
कर्मचारियों के इस आंदोलन का सीधा असर वादकारियों पर पड़ रहा है। पर्याप्त कर्मचारियों के अभाव में हर मामले की सुनवाई की प्रक्रिया में भारी देरी हो रही है, जिसके परिणामस्वरूप आम लोगों के लिए न्याय का इंतजार और अधिक लंबा होता जा रहा है। न्याय प्रणाली की इस दयनीय स्थिति से पार पाने और बुनियादी ढांचे में सुधार के साथ-साथ खाली पदों पर तत्काल भर्ती की मांग को लेकर राज्य भर के अदालत के कर्मचारियों ने इस दो दिवसीय कार्य बहिष्कार को चुना। चूंकि आज इस कार्य बहिष्कार का अंतिम दिन है, इसलिए बांकुड़ा जिला अदालत में बिल्कुल भी काम नहीं हुआ। अदालत के कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार और संबंधित अधिकारी इस गंभीर मामले में तुरंत हस्तक्षेप नहीं करते हैं, तो वे आने वाले दिनों में और भी बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।

