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'विपक्ष की आवाज दबाने के लिए झूठे मामले', आसनसोल जेल से बाहर आने के तुरंत बाद बोले अरूप मुखर्जी

নির্ভীক বাংলা নিউজ ডেস্ক
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16 सितंबर 2026 को 10:58 am बजे
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'विपक्ष की आवाज दबाने के लिए झूठे मामले', आसनसोल जेल से बाहर आने के तुरंत बाद बोले अरूप मुखर्जी
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श्याम दास, आसनसोल: बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की तस्वीरों और पोस्टरों का अपमान करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए आसनसोल के वरिष्ठ कांग्रेस नेता अरूप मुखर्जी को आखिरकार अदालत से जमानत मिल गई और बुधवार को उन्हें आसनसोल विशेष संशोधन गृह (जेल) से रिहा कर दिया गया। लगातार चार दिन न्यायिक हिरासत में बिताने के बाद जैसे ही वह बाहर निकले, जेल के मुख्य द्वार के सामने इंतजार कर रहे पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में भारी उत्साह देखा गया।

जेल से बाहर आते ही पार्टी कार्यकर्ताओं ने उन्हें फूलों की माला पहनाई और उनके समर्थन में तथा राज्य सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। इस स्वागत समारोह में शाह आलम, विश्वनाथ यादव सहित शीर्ष जिला कांग्रेस नेता, कई स्थानीय पदाधिकारी और कई कार्यकर्ता मौजूद थे।

यह विवाद हाल ही में संपन्न हुई दुर्गा पूजा के दौरान शुरू हुआ था। मध्य प्रदेश के बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक आपत्तिजनक संदेश दिया था, जिसमें उन्होंने दुर्गा पूजा के दिनों में लोगों से मांसाहार न करने का आग्रह किया था। इसे दुर्गा पूजा के दौरान बंगाली संस्कृति की परंपराओं और खान-पान की आदतों पर हमला मानते हुए स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश फैल गया। इसके विरोध में अरूप मुखर्जी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आसनसोल में प्रदर्शन किया और कथित तौर पर बागेश्वर बाबा की तस्वीरों और पोस्टरों को जला दिया।

इस घटना को लेकर आसनसोल औद्योगिक क्षेत्र में राजनीतिक तापमान बढ़ने लगा। भाजपा युवा मोर्चा ने कांग्रेस नेता के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाते हुए आसनसोल दक्षिण थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। दर्ज प्राथमिकी (FIR) के आधार पर आसनसोल दक्षिण थाने की पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 43 वर्षीय अरूप मुखर्जी को मोहिषिला कॉलोनी स्थित उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया।

न्यायिक हिरासत में चार लंबे दिन बिताने के बाद बुधवार को अदालत द्वारा जमानत दिए जाने पर उन्हें रिहा कर दिया गया। संशोधन गृह से बाहर निकलते ही कांग्रेस नेता ने मीडिया से बात करते हुए राज्य सरकार और पुलिस व्यवस्था पर अपना गुस्सा निकाला। उन्होंने आरोप लगाया, "वर्तमान में पश्चिम बंगाल में लोकतांत्रिक अधिकार नाम की कोई चीज नहीं बची है। विपक्ष की आवाज दबाने के लिए चुन-चुनकर झूठे मामले दर्ज किए जा रहे हैं। हालांकि, कानूनी लड़ाई और सड़कों पर विरोध प्रदर्शन नहीं थमेगा।"

इस घटना को लेकर आसनसोल औद्योगिक क्षेत्र के राजनीतिक गलियारों में सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच कयासबाज़ी और तीखी राजनीतिक बयानबाजी चरम पर पहुंच गई है।

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প্রধান সম্পাদক ও প্রকাশক, নির্ভীক বাংলা।

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