आसनसोल नगर निगम के वार्ड नंबर 75 और 56 के बीच रियेल फाटक के पास जर्जर सड़क की बदहाल स्थिति के खिलाफ आखिरकार स्थानीय निवासियों का गुस्सा फूट पड़ा। शुक्रवार सुबह इस पुरानी समस्या के स्थायी समाधान की मांग को लेकर और अपना तीव्र आक्रोश व्यक्त करते हुए सड़क जाम कर दिया गया।
निवासियों का आरोप है कि इस सड़क की जर्जर हालत कोई नई समस्या नहीं है। कई वर्षों से स्थानीय लोग इस सड़क की मरम्मत की मांग कर रहे हैं। पूर्ववर्ती वामपंथ शासनकाल से लेकर वर्तमान सरकार तक—विभिन्न स्तरों पर बार-बार गुहार लगाने के बावजूद कुछ अस्थायी मरम्मत के अलावा कोई स्थायी कदम नहीं उठाया गया। हल्की सी बारिश में भी सड़क पर जलजमाव हो जाता है और यह गड्ढों में तब्दील हो जाती है, जिससे अक्सर छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं होती रहती हैं।
स्थानीय लोगों का दावा है कि इस खतरनाक सड़क के कारण ऑटो, टोटो रिक्शा और बाइक आए दिन पलट जाते हैं। विशेष रूप से, गुरुवार रात इस गड्ढे भरी सड़क पर एक महिला गिर गई, जिससे उसके हाथ की हड्डी टूट गई और उसे गंभीर चोटें आईं। ठीक अगले दिन, शुक्रवार सुबह, इसी वजह से एक अन्य बाइक सवार ने अपना नियंत्रण खो दिया और सड़क पर गिर पड़ा। बार-बार होने वाली इन दुर्घटनाओं से धैर्य खोकर निवासी सड़कों पर उतर आए।
जैसे ही स्थिति बिगड़ी, स्थानीय निवासियों ने शुक्रवार सुबह रियेल फाटक क्षेत्र में सड़क जाम कर दी। इसके परिणामस्वरूप, लगभग एक घंटे तक भीषण ट्रैफिक जाम लग गया, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सूचना मिलते ही स्थानीय थाने के प्रतिनिधि और संबंधित सेल (स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड) के अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे।
प्रदर्शन के दौरान सेल अधिकारियों और निवासियों के बीच लंबी बातचीत हुई। अधिकारियों द्वारा दिए गए आश्वासन के आधार पर आखिरकार जाम हटा लिया गया। सेल अधिकारियों ने कहा कि फिलहाल दुर्घटनाओं से बचने के लिए गड्ढों को जल्दी भरने के अस्थायी उपाय किए जाएंगे। इसके अलावा, आगामी दुर्गा पूजा के तुरंत बाद सेल की पहल पर सड़क के स्थायी कंक्रीटीकरण या जीर्णोद्धार का काम शुरू किया जाएगा।
इस बीच, प्रदर्शन के वीडियो फुटेज से पता चला कि स्थानीय लोगों ने न केवल सेल अधिकारियों के प्रति, बल्कि वर्तमान राज्य सरकार की भूमिका को लेकर भी भारी नाराजगी जताई। आक्रोशित भीड़ ने सवाल उठाया कि विकास के लंबे-चौड़े वादों के बावजूद सड़क की मरम्मत क्यों नहीं की गई। हालांकि, निवासियों के एक वर्ग ने सरकार की सद्भावना पर भरोसा जताते हुए इस दुर्दशा से जल्द राहत मिलने की उम्मीद जताई। अब देखना यह होगा कि सेल अधिकारी और प्रशासन अपने वादों पर किस हद तक खरे उतरते हैं और इस जन-समस्या का स्थायी अंत कब होता है।

