क्या दुमका के रास्ते नौला थाना क्षेत्र के पत्थरघट्टा से अवैध बालू बंगाल पहुंच रहा है? बिहार-झारखंड के विभिन्न जिलों के चालान के इस्तेमाल का दावा, बंगाल पुलिस की सख्ती से तस्करों में मची हड़कंप
आसनसोल: झारखंड के जामताड़ा जिले में अजय नदी से कथित अवैध बालू खनन और तस्करी का मामला एक बार फिर चर्चा में है। सूत्रों के मुताबिक, नौला थाना क्षेत्र के पत्थरघट्टा इलाके में अजय नदी से कथित तौर पर बड़े पैमाने पर बालू निकाला जा रहा है और रोजाना सैकड़ों वाहनों के जरिए इसे दूसरे राज्यों में भेजा जाता है। दावा किया जा रहा है कि इस कथित कारोबार से जुड़ा नेटवर्क झारखंड से शुरू होकर दुमका होते हुए पश्चिम बंगाल के बीरभूम समेत कई जिलों और कस्बों तक फैला हुआ है।
सूत्रों का दावा है कि पत्थरघट्टा से निकलने वाले बालू लदे वाहन न केवल धनबाद या स्थानीय इलाके के चालान का इस्तेमाल कर रहे होंगे, बल्कि बिहार के गया, जमुई और नालंदा जैसे जिलों के चालान का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि, इन दावों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और पूरे मामले की प्रशासनिक जांच की जरूरत है।
पत्थरघट्टा से रोजाना 100 से 200 ट्रक निकलने का दावा
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, पत्थरघट्टा इलाके में अजय नदी से कथित तौर पर बड़े पैमाने पर बालू उठाया जा रहा है। यह दावा किया जाता है कि यहां से रोजाना करीब 100 से 200 ट्रक बालू दूसरे इलाकों में भेजी जा रही है।
यह भी आरोप है कि बालू को विभिन्न रास्तों से पश्चिम बंगाल पहुंचाया जा रहा है। दुमका के रास्ते बीरभूम और बंगाल के अन्य इलाकों में इसकी आपूर्ति की खबरें सामने आई हैं.
यदि यह दावा सही पाया जाता है, तो सवाल उठता है कि संबंधित विभागों की जानकारी के बिना इतने बड़े पैमाने पर कथित बालू परिवहन कैसे संचालित हो रहा है? नदी घाटों से लेकर परिवहन मार्गों और अंतर-राज्यीय सीमा तक निगरानी प्रणाली पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
चालान का खेल या दस्तावेजों का दुरुपयोग
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर आरोप चालान को लेकर है। सूत्रों के मुताबिक, कुछ बालू लदे वाहनों के साथ ऐसे जिलों के चालान जोड़े जा रहे हैं, जिनका वास्तविक लोडिंग पॉइंट और वाहन का रूट मेल नहीं खाता है।
झारखंड से आने वाले बालू वाहनों के साथ बिहार के गया, जमुई और नालंदा जैसे जिलों के चालान जोड़े जाने की खबर है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर चालान किसी दूसरे जिले का है, तो संबंधित वाहन ने असल में किस जगह से बालू ढोना शुरू किया था? क्या चालान वास्तविक लोडिंग पॉइंट से जुड़ा हुआ है? और क्या वाहन के रूट, लोडिंग पॉइंट और दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है?
जांच के बाद ही इन सवालों के जवाब साफ हो पाएंगे।
आसनसोल तक परिवहन का कथित प्रयास
सूत्रों के मुताबिक, प्रसेनजीत गुट से जुड़े लोग नौला थाना क्षेत्र के रास्ते पश्चिम बर्द्धमान जिले के आसनसोल और आसपास के इलाकों में बालू पहुंचाने की कथित कोशिश कर रहे थे।
यह दावा किया जा रहा है कि कुछ वाहनों में नालंदा और जमुई के चालान लगे हुए थे। हालांकि, इन आरोपों की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सूत्रों का यह भी दावा है कि यह कथित नेटवर्क पहले भी पश्चिम बंगाल में बालू के कारोबार में शामिल रहा है और अब सत्ता परिवर्तन के बाद एक बार फिर सक्रिय होने की कोशिश कर रहा है।
इन आरोपों में राजनीतिक दलों और नेताओं के नाम भी सामने आ रहे हैं। लेकिन किसी भी राजनीतिक व्यक्ति या संगठन पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। इसलिए, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
बंगाल पुलिस की सख्ती ने बिगाड़ा खेल
पश्चिम बंगाल द्वारा दूसरे राज्यों से चालान पर आने वाले बालू वाहनों की जांच कड़ी किए जाने के बाद, कथित बालू तस्करी नेटवर्क के सामने नई मुश्किलें खड़ी हो गई हैं।
सूत्रों के मुताबिक, अब केवल चालान दिखाना ही पर्याप्त नहीं माना जा रहा है, बल्कि लोडिंग पॉइंट से जुड़े जीपीएस फोटो और लोकेशन जैसे सबूत भी मांगे जा रहे हैं।
इसके बाद झारखंड के डिबुडीह चेक पोस्ट से रूपनारायणपुर चेक पोस्ट तक बालू लदे वाहनों की लंबी कतारें लग जाने की खबर है।
बताया जा रहा है कि सीमा पर बड़ी संख्या में वाहन चेकिंग के इंतजार में खड़े हैं। दस्तावेजों और लोडिंग पॉइंट की जानकारी आपस में मेल न खाने के कारण वाहनों को आगे बढ़ने में परेशानी हो रही है।
बाराबनी में पांच वाहन पकड़े जाने का दावा
इस बीच, पश्चिम बर्द्धमान जिले के बाराबनी थाना क्षेत्र में बिहार के चालान वाले पांच बालू लदे वाहन पकड़े जाने की खबर है।
सूत्रों के मुताबिक, पुलिस को इन वाहनों के कागजातों और उनके कथित रूट को लेकर शक हुआ। यह दावा किया जा रहा है कि जिन चालानों के आधार पर वाहन बालू ढो रहे थे, उनके अनुसार नौला थाना क्षेत्र के रास्ते बाराबनी पहुंचने वाले संबंधित वाहनों की आवाजाही संदिग्ध थी।
इसके अलावा यह जानकारी भी सामने आ रही है कि लोडिंग पॉइंट का जरूरी जीपीएस फोटो और लोकेशन उपलब्ध नहीं था।
अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि वाहनों में लगे चालान असली हैं या फिर उनका किसी अन्य तरीके से इस्तेमाल किया गया है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे नेटवर्क की असल तस्वीर सामने आएगी।
कार्रवाई से बालू व्यापारियों में मची खलबली
बंगाल पुलिस और प्रशासन की इस सख्ती के बाद झारखंड और बिहार से बालू लाने वाले वाहन चालकों और कथित तस्करी नेटवर्क के बीच हड़कंप मचने की खबर है।
सूत्रों का कहना है कि सीमा पर सख्त दस्तावेज सत्यापन और जीपीएस आधारित सत्यापन ने उन लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं जो कथित तौर पर किसी अन्य स्थान के चालान के आधार पर बालू ढोने की कोशिश कर रहे थे।
अब कथित बालू व्यापारी इस सख्ती से बचने के लिए नए रास्ते और नए तरीके तलाश रहे हैं।
जांच की जाए तो हो सकता है बड़े नेटवर्क का खुलासा
यदि अजय नदी के पत्थरघट्टा क्षेत्र से दुमका, झारखंड-बंगाल सीमा और पश्चिम बर्द्धमान के बाराबनी-आसनसोल तक बालू परिवहन के पूरे नेटवर्क की जांच की जाए, तो कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं।
जांच एजेंसियों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि—
वास्तव में किस लोडिंग पॉइंट से बालू उठाया गया,
वाहन के पास मौजूद चालान किस जगह के लिए जारी किया गया था,
चालान और वाहन के जीपीएस रूट में कितना अंतर है,
क्या वाहन के कागजात असली हैं?
क्या झारखंड से निकाले गए बालू के लिए बिहार के चालानों का इस्तेमाल किया गया,
अजय नदी के तट पर अवैध खनन हो रहा है या नहीं,
क्या संबंधित विभागों को रोजाना सैकड़ों वाहनों की कथित आवाजाही की जानकारी थी या नहीं,
इन सवालों के जवाब प्रशासनिक और पुलिस जांच के बाद ही सामने आएंगे।
अब सबकी नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं
अजय नदी से कथित अवैध बालू खनन और अंतर-राज्यीय परिवहन के इस मामले ने एक बार फिर अवैध बालू कारोबार पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि रोजाना 100 से 200 ट्रक परिवहन का दावा सच है, तो यह छोटे पैमाने का मामला नहीं है बल्कि एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करता है।
फिलहाल, बंगाल पुलिस की सख्ती के बाद सीमा पर वाहनों की चेकिंग तेज हो गई है और कुछ वाहन पकड़े जाने की खबरें सामने आई हैं। अब यह देखना बाकी है कि जांच केवल वाहनों और चालानों तक सीमित रहती है या अजय नदी में कथित अवैध बालू खनन से लेकर बंगाल में बालू डंप करने तक के पूरे नेटवर्क तक पहुंचती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि—किस के संरक्षण में अजय नदी से निकलने वाली कथित अवैध बालू सीमा पार कर रही है और फर्जी या संदिग्ध दस्तावेजों के जरिए इसे बंगाल की मंडी तक पहुंचाने का पूरा नेटवर्क कितना बड़ा है?
आने वाले दिनों में पुलिस और प्रशासन की जांच इस कथित बालू तस्करी के खेल की असली तस्वीर उजागर कर सकती है।

