पुरुलिया, झारखंड के अलावा पश्चिम बंगाल के पुरुलिया, मिदनापुर व बांकुड़ा जिलों, ओडिशा के क्योंझर, मयूरभंज, बारीपदा जिलों में मनाया जाता है टुसु पर्व एक महीने तक घर की बेटी की तरह रखकर उनकी पूजा याचना के बाद उनकी विषर्जन की जाती है, पुरुलिया मे भी काफी धूमधाम से टुसु का पर्व मनाया गया और नम आँखों से महिलाओं ने टुसु की विदाई दी, इस दौरान उन्होंने टुसु पर्व के अपने -अपने अनुभव को भी साझा किया और बेहद भाऊक हो उठी, कहा जाता है की अगहन संक्रांति के दिन गांव की कुंवारी कन्याएं टुसू की मूर्ति बनाती हैं। इसी मूर्ति के चारों ओर सजावट करती हैं और फिर धूप, दीप के साथ टुसू की पूजा करती हैं। मकर संक्रांति के दिन टुसू पर्व मनाया जाता है और फिर उसके अगले दिन इसे नदी में प्रवाहित किया जाता है। मकर संक्रांति के एक दिन पहले पुरुषों द्वारा बिना बाजी का मुर्गोत्सव मनाया जाता है जिसे बाउड़ी कहा जाता है। इस उत्सव से लौटने के उपरांत सारी रात लोग गाते- बजाते हैं। सुबह सभी ग्रामीण मकर स्नान के लिए नदी पहुंचते हैं। स्नान के दौरान गंगा माई का नाम लेकर मिठाई भी बहाते हैं। उत्सव और मेले का आनंद लेने के बाद टुसू का विसर्जन गाजे-बाजे के साथ कर दिया जाता है। टुसू पर्व मनाए जाने के पीछे की कहानी टुसू पर्व को धूमधाम से मनाने के पीछे कई कई कहानियां प्रचलित हैं। टुसू एक गरीब कुरमी किसान की अत्यंत सुंदर कन्या थी। धीरे-धीरे संपूर्ण राज्य में उसकी सुंदरता का बखान होने लगा। एक क्रूर राजा के दरबार में भी खबर फैल गई। राजा को लोभ हो गया और कन्या को प्राप्त करने के लिए उसने षड्यंत्र रचना प्रारंभ कर दिया। उस वर्ष राज्य में भीषण अकाल पड़ा था। किसान लगान देने की स्थिति में नहीं थे। इस स्थिति का फायदा उठाने के लिए राजा ने कृषि कर दोगुना कर दिया। गरीब किसानों से जबरन कर वसूली का राज्यादेश दे दिया। पूरे राज्य में हाहाकार मच गया टुसू ने किसान समुदाय से एक संगठन खड़ा कर राजा के आदेश का विरोध करने का आह्वान किया। राजा के सैनिकों और किसानों के बीच भीषण युद्ध हुआ। हजारों किसान मारे गये टुसू भी सैनिकों की गिरफ्त में आने वाली थी। उसने राजा के आगे घुटने टेकने के बजाय जल-समाधि लेकर शहीद हो जाने का फैसला किया और उफनती नदी में कूद गई। टुसू की इस कुरबानी की याद में ही टुसू पर्व मनाया जाता है और टुसू की प्रतिमा बनाकर नदी में विसर्जित कर श्रद्धांजलि अर्पित किया जाता है। टुसू कुंवारी कन्या थी इसलिए इस पर्व में कुंवारी लड़कियों की ही भूमिका अधिक होती है।
State
The immersion took place after worshiping the daughter of the house Tusu for a month with pomp, dance and songs.
Apart from Purulia, Jharkhand, Tusu festival is celebrated in Purulia, Midnapore and Bankura districts of West Bengal, Keonjhar, Mayurbhanj, Baripada districts of Odisha. Tusu festival is celebrated like a daughter of the house for a month.

Apart from Purulia, Jharkhand, Tusu festival is celebrated in Purulia, Midnapore and Bankura districts of West Bengal, Keonjhar, Mayurbhanj,|Nirbhik Bangla Photo
