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Political turmoil over 'three Krishnandu' in Asansol North Assembly, BJP candidate expressed fear of conspiracy

Asansol, In view of the West Bengal Assembly elections 2026, a strange situation arose in the Asansol North Assembly seat when during scrutiny, three candidates each with the same name appeared...

Abdul Haque
Abdul Haque
July 11, 2026 at 03:36 AM
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Political turmoil over 'three Krishnandu' in Asansol North Assembly, BJP candidate expressed fear of conspiracy
Asansol, In view of the West Bengal Assembly elections 2026, a strange situation arose in the Asansol North Assembly seat when during scruti|Nirbhik Bangla Photo

आसनसोल, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनज़र आसनसोल उत्तर विधानसभा सीट पर उस समय एक अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई, जब स्क्रूटनी के दौरान एक ही नाम के तीन-तीन उम्मीदवार सामने आ गए। इस घटनाक्रम ने न सिर्फ प्रशासनिक अधिकारियों को कुछ समय के लिए उलझन में डाल दिया, बल्कि राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया है। मंगलवार को आसनसोल एसडीएम कार्यालय में नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी की प्रक्रिया चल रही थी। इस दौरान अलग-अलग उम्मीदवार अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। इन्हीं में भाजपा के कदावर उम्मीदवार कृषनेन्दु मुखर्जी भी मौजूद थे। जैसे ही अधिकारियों ने उम्मीदवारों के नाम पुकारने शुरू किए, वहां मौजूद लोगों को पहले तो सामान्य प्रक्रिया लगी, लेकिन स्थिति तब चौंकाने वाली हो गई जब एक के बाद एक ‘कृषनेन्दु’ नाम पुकारा जाने लगा। सबसे पहले ‘कृषनेन्दु मुखोपाध्याय’ का नाम पुकारा गया, फिर ‘कृषनेन्दु चटर्जी’ और अंत में भाजपा उम्मीदवार ‘कृषनेन्दु मुखर्जी’। एक ही विधानसभा सीट से एक जैसे नाम वाले तीन उम्मीदवारों के सामने आने से वहां मौजूद हर व्यक्ति हैरान रह गया। कुछ समय के लिए तो अधिकारियों को भी स्पष्ट करना पड़ा कि कौन सा उम्मीदवार किस पार्टी या निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ रहा है। इस घटना के बाद मौके पर मौजूद अन्य उम्मीदवारों और उनके समर्थकों में भी चर्चा शुरू हो गई। राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। कई लोगों का मानना है कि यह मतदाताओं को भ्रमित करने की रणनीति हो सकती है, जिससे वोटों का बंटवारा किया जा सके। इस पूरे मामले पर भाजपा उम्मीदवार कृषनेन्दु मुखर्जी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कल्ला स्थित भाजपा जिला कार्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में इस घटना को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि यह कोई संयोग नहीं हो सकता, बल्कि एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है। कृषनेन्दु मुखर्जी ने कहा, “मुझे पूरी तरह से पता है कि मेरे नाम से मिलते-जुलते लोगों को इस सीट से क्यों उतारा गया है और किसके इशारे पर उतारा गया है। हालांकि मैं अभी खुलकर नाम नहीं लेना चाहता, लेकिन यह साफ है कि विरोधी दल भाजपा से घबराए हुए हैं।” उन्होंने आगे कहा कि आसनसोल उत्तर विधानसभा में भाजपा की बढ़ती लोकप्रियता से अन्य राजनीतिक दलों में भय का माहौल है। “हमारी पार्टी की मजबूती और जनता का समर्थन देखकर विपक्ष घबरा गया है। यही वजह है कि इस तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं, ताकि मतदाताओं को भ्रमित किया जा सके,” उन्होंने आरोप लगाया। भाजपा उम्मीदवार ने व्यंग्यात्मक लहजे में यह भी कहा कि वह खुद कई ‘कृषनेन्दु’ नाम के लोगों को जानते हैं। “अगर जरूरत पड़ी तो मैं अपने विरोधियों को और भी कृषनेन्दु से मिलवा सकता हूं। तब शायद इस सीट पर दो नहीं, बल्कि दर्जनों कृषनेन्दु उम्मीदवार खड़े हो जाएंगे,” उन्होंने कहा। इस पूरे घटनाक्रम ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि निर्वाचन आयोग की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन जानकारों का कहना है कि एक ही नाम के कई उम्मीदवारों का होना चुनावी नियमों के खिलाफ नहीं है, बशर्ते सभी उम्मीदवारों के दस्तावेज सही हों। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारत के चुनावों में इस तरह की घटनाएं नई नहीं हैं। पहले भी कई जगहों पर प्रमुख उम्मीदवारों के नाम से मिलते-जुलते नाम वाले उम्मीदवार खड़े किए गए हैं, जिससे मतदाताओं में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है। खासकर ग्रामीण और कम शिक्षित मतदाताओं के बीच इसका प्रभाव अधिक देखा जाता है। स्थानीय मतदाताओं में भी इस घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोगों ने इसे लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय बताया, तो कुछ ने इसे चुनावी रणनीति का हिस्सा मानते हुए सामान्य घटना कहा। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “अगर एक ही नाम के कई उम्मीदवार होंगे, तो आम मतदाता के लिए सही उम्मीदवार पहचानना मुश्किल हो सकता है। इससे वोटिंग पर असर पड़ सकता है।” वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि आज के डिजिटल युग में मतदाता पहले से ज्यादा जागरूक हैं और वे उम्मीदवार के नाम के साथ-साथ पार्टी का चुनाव चिन्ह देखकर वोट करते हैं, इसलिए इस तरह की रणनीति का प्रभाव सीमित हो सकता है। फिलहाल, आसनसोल उत्तर विधानसभा में ‘तीन कृषनेन्दु’ का मामला चुनावी माहौल को और गरमा चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मुद्दा किस तरह से राजनीतिक रंग लेता है और चुनावी नतीजों पर इसका क्या असर पड़ता है।

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প্রধান সম্পাদক ও প্রকাশক, নির্ভীক বাংলা।

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