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पहले कैंसर को दी मात, अब टिक फीवर और लीवर की बीमारी से जूझ रहा 7 वर्षीय स्ट्रीट डॉग भोला

आसनसोल के रवींद्र भवन में सबका चहेता है भोला, पत्रकारों और पशु प्रेमियों की मदद से पहले कैंसर का हुआ था इलाज, अब पशु चिकित्सक पार्थ गांगुली और उनकी टीम जुटी है जान बचाने में
आसनसोल, इंसानों और बेजुबान जानवरों के बीच प्रेम और अपनापन किस तरह एक गहरा रिश्ता बना सकता है, इसकी मिसाल है आसनसोल के रवींद्र भवन में रहने वाला सात वर्षीय स्ट्रीट डॉग भोला। कभी कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को मात दे चुका भोला अब एक बार फिर जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है। इस बार वह टिक फीवर, अग्न्याशय में सूजन, लीवर की समस्या और खून की कमी से जूझ रहा है। भोला की बिगड़ती तबीयत को देखते हुए पशु चिकित्सक पार्थ गांगुली और उनके सहयोगी पिछले एक सप्ताह से उसका इलाज कर रहे हैं। वहीं, भोला को स्वस्थ करने के लिए पत्रकारों और पशु प्रेमियों से आर्थिक सहयोग भी लिया जा रहा है।
2020 में रवींद्र भवन आया था भोला, अपने व्यवहार से बना सबका चहेता
भोला की कहानी वर्ष 2020 से शुरू होती है। उस समय उसकी उम्र लगभग एक वर्ष थी, जब वह आसनसोल के रवींद्र भवन परिसर में आया था। एक स्ट्रीट डॉग होने के बावजूद भोला का व्यवहार इतना प्यारा, मिलनसार और अपनापन भरा था कि रवींद्र भवन में काम करने वाले कर्मचारी उसे वहां से भगा नहीं सके।
धीरे-धीरे रवींद्र भवन ही भोला का घर बन गया। वह दिन-रात इसी परिसर में रहने लगा। शुरुआत में रवींद्र भवन आने-जाने वाले लोगों को देखकर वह भौंकने लगता था। लेकिन जब कर्मचारी उसे मना करते, तो वह चुप हो जाता था। उसके इस व्यवहार ने जल्द ही सभी का दिल जीत लिया।
देखते ही देखते भोला केवल रवींद्र भवन के कर्मचारियों का ही नहीं, बल्कि वहां आने-जाने वाले लोगों का भी चहेता बन गया। पश्चिम बर्धमान प्रेस क्लब के सदस्यों के साथ भी उसका गहरा जुड़ाव हो गया। भोला के प्रति लोगों का स्नेह इस कदर बढ़ा कि कई लोग अपने साथ उसके लिए बिस्कुट लेकर आने लगे।
रवींद्र भवन में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों के दौरान जब खाना बच जाता, तो भोला भी उसमें से कुछ खाकर अपना पेट भर लेता था। इस तरह रवींद्र भवन परिसर में रहने वाले लोगों के बीच भोला परिवार के एक सदस्य की तरह हो गया।
जब कैंसर ने जकड़ा, तब पत्रकारों और एनजीओ ने बढ़ाए मदद के हाथ
भोला की जिंदगी में सब कुछ ठीक चल रहा था। लेकिन रवींद्र भवन आने के दो-तीन साल बाद उसे कैंसर जैसी गंभीर बीमारी ने अपनी चपेट में ले लिया। भोला की बीमारी की खबर से उसे चाहने वाले लोग चिंतित हो गए।
ऐसे मुश्किल समय में पत्रकारों ने पहल की और कुछ एनजीओ की मदद से भोला के इलाज की व्यवस्था की गई। लोगों के सहयोग और उपचार के बाद उसकी तबीयत में सुधार होने लगा। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ते हुए भोला ने एक बार फिर स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ाया।
इस दौरान भी भोला कई बार बीमार पड़ा। जब भी उसकी बीमारी की खबर पशु चिकित्सक पार्थ गांगुली तक पहुंची, वह अपने सहयोगियों के साथ रवींद्र भवन पहुंच गए। उन्होंने बिना किसी लोभ के भोला का इलाज किया और उसकी देखभाल में सहयोग दिया।
कैंसर से उबरने के बाद अब चार गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा भोला
कैंसर की बीमारी से उबरने के बाद भोला की तबीयत सामान्य हुई ही थी कि अब वह एक बार फिर गंभीर रूप से बीमार पड़ गया है। इस बार उसे टिक फीवर, अग्न्याशय में सूजन, लीवर की समस्या और खून की कमी जैसी स्वास्थ्य समस्याएं हो गई हैं।
भोला की बीमारी की जानकारी मिलने के बाद पशु चिकित्सक पार्थ गांगुली और उनके सहयोगी एक बार फिर उसकी मदद के लिए आगे आए हैं। पिछले एक सप्ताह से उसका इलाज जारी है।
हालांकि, भोला की बीमारी में इस्तेमाल होने वाली दवाइयां काफी महंगी हैं। ऐसे में उसके इलाज का खर्च जुटाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। पशु चिकित्सक पार्थ गांगुली पशु प्रेमियों से आर्थिक सहयोग लेकर भोला के उपचार की व्यवस्था कर रहे हैं, ताकि पैसों की कमी उसके इलाज में बाधा न बने।
'मानवता के नाते कर रहे हैं भोला का इलाज'
पशु चिकित्सक पार्थ गांगुली का कहना है कि वह मानवता के नाते भोला का इलाज कर रहे हैं। इसके लिए पशु प्रेमियों से आर्थिक सहयोग लिया जा रहा है, क्योंकि उसकी बीमारी में इस्तेमाल होने वाली दवाइयां काफी महंगी हैं।
उन्होंने बताया कि अपनी क्षमता के अनुसार वह हर संभव प्रयास कर रहे हैं, ताकि भोला एक बार फिर स्वस्थ हो सके। उनका उद्देश्य केवल भोला का इलाज करना ही नहीं, बल्कि समाज में बेजुबान जानवरों के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना को भी बढ़ावा देना है।
पार्थ गांगुली के मुताबिक, वह भोला की तरह ही कई अन्य बीमार स्ट्रीट डॉग का भी इलाज करते हैं। उनका प्रयास रहता है कि सड़क पर रहने वाले बीमार और जरूरतमंद पशुओं को समय पर उपचार मिल सके।
बीमार स्ट्रीट डॉग की मदद के लिए आगे आने की अपील
भोला की कहानी केवल एक स्ट्रीट डॉग की बीमारी और इलाज तक सीमित नहीं है। यह उन लोगों के प्रेम, संवेदना और मानवीय प्रयासों की कहानी भी है, जिन्होंने एक बेजुबान जानवर को अपने परिवार का हिस्सा बना लिया।
रवींद्र भवन में आने वाले लोगों के लिए कभी भौंककर उनका स्वागत करने वाला भोला आज खुद दूसरों की मदद का इंतजार कर रहा है। जिस परिसर में उसने वर्षों तक लोगों का प्यार पाया, वहीं अब उसकी जिंदगी बचाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
पशु चिकित्सक पार्थ गांगुली ने लोगों से अपील की है कि वे बीमार स्ट्रीट डॉग की सहायता के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा कि बेजुबान जानवरों को केवल भोजन ही नहीं, बल्कि बीमारी के समय उचित इलाज और देखभाल की भी जरूरत होती है। हर व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार इनकी मदद कर सकता है और इनके लिए दो वक्त के भोजन की व्यवस्था करने में भी योगदान दे सकता है।
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को मात देने वाला भोला आज फिर जिंदगी की जंग लड़ रहा है। रवींद्र भवन के कर्मचारियों, पत्रकारों, पशु चिकित्सकों और पशु प्रेमियों को उम्मीद है कि सामूहिक प्रयासों से भोला एक बार फिर स्वस्थ होकर अपने पुराने चंचल अंदाज में लौटेगा।
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