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आसनसोल में बीजेपी के वायरल पत्र पर सियासी घमासान, कांग्रेस ने उठाए सवाल, BJP विधायक बोले- पत्र पूरी तरह फर्जी

নির্ভীক বাংলা নিউজ ডেস্ক
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৬ সেপ্টেম্বর, ২০২৬ এ ০৯:৫৬ AM
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आसनसोल में बीजेपी के वायरल पत्र पर सियासी घमासान, कांग्रेस ने उठाए सवाल,  BJP विधायक बोले- पत्र पूरी तरह फर्जी
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थाना-अस्पताल से जुड़े प्रतिनिधियों की नियुक्ति और फिर वापसी को लेकर विवाद, कांग्रेस नेता प्रसंजीत पोइतूंडी ने बीजेपी पर लगाए गंभीर आरोप


आसनसोल, पश्चिम बंगाल के आसनसोल में भारतीय जनता पार्टी के एक कथित वायरल पत्र को लेकर सियासी विवाद गहरा गया है। आसनसोल सांगठनिक जिला बीजेपी के दक्षिण मंडल-1 के अध्यक्ष सोमनाथ मंडल के नाम और लेटरहेड से जारी बताए जा रहे एक पत्र को लेकर कांग्रेस ने बीजेपी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, आसनसोल नॉर्थ विधानसभा के बीजेपी विधायक कृषनेन्दु मुखर्जी ने इस पत्र को पूरी तरह फर्जी बताया है।

वायरल पत्र में थाना और अस्पताल से संबंधित संगठनात्मक जिम्मेदारियों को लेकर बीजेपी की ओर से प्रतिनिधियों की नियुक्ति और बाद में उन जिम्मेदारियों को वापस लेने का दावा किया गया है। पत्र पर मुहर भी दिखाई दे रही है और इसे सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित किया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि 5 सितंबर 2026 को जारी कथित सूचना में कहा गया कि थाना एवं अस्पताल से संबंधित जिन व्यक्तियों के नाम और दायित्व की पहले घोषणा की गई थी, उस घोषणा को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाता है। पत्र के मुताबिक, पहले जिम्मेदारी पाने वाले कार्यकर्ता अब संबंधित थाना अथवा अस्पताल के साथ संगठन की ओर से समन्वय के लिए अधिकृत प्रतिनिधि नहीं माने जाएंगे।

इससे पहले सामने आई सूचनाओं में आसनसोल दक्षिण पीपी और हीरापुर थाना के लिए अलग-अलग बीजेपी प्रतिनिधियों के नाम दिए जाने का दावा किया गया था। आसनसोल दक्षिण पीपी के लिए उत्तम कर्मकार, अनूप सिंह और राहुल रॉय के नाम बताए गए, जबकि हीरापुर थाना से संबंधित प्रतिनिधियों के तौर पर अरुण बौरी, काजल चक्रवर्ती और रहित केउरा के नाम सामने आए।

कथित नियुक्ति संबंधी सूचनाओं में दावा किया गया था कि ये प्रतिनिधि आसनसोल दक्षिण मंडल-1 की ओर से संबंधित पुलिस इकाई के साथ आवश्यक संवाद और समन्वय करेंगे तथा मंडल के लोगों की ओर से प्रतिनिधित्व करेंगे।

हालांकि, बाद में जारी कथित पत्र में इन सभी जिम्मेदारियों को वापस लेने की बात कही गई। इसी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।


कांग्रेस नेता ने बीजेपी पर साधा निशाना


कांग्रेस नेता प्रसंजीत पोइतूंडी ने इस पूरे मामले को लेकर बीजेपी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किसी मंडल अध्यक्ष को थाना चलाने अथवा पुलिस की कार्यप्रणाली में हस्तक्षेप करने का अधिकार किसने दिया है।

प्रसंजीत पोइतूंडी ने आरोप लगाते हुए कहा कि क्या बीजेपी पुलिस राज कायम करना चाहती है। उन्होंने दावा किया कि 4 तारीख की शाम से पुलिस पर राजनीतिक प्रभाव बढ़ गया है और आरोप लगाया कि पुलिस ने तृणमूल की जर्सी उतारकर बीजेपी का गमछा पहन लिया है।

कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी संविधान के अनुसार काम कर रहे हैं और शायद इसी वजह से बीजेपी के कुछ लोग उन पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि गले में बीजेपी का गमछा डालकर किसी व्यक्ति को थाने में पुलिस अधिकारियों के बगल में बैठाने से संविधान के तहत चलने वाली पुलिस व्यवस्था नहीं बदल सकती।

प्रसंजीत पोइतूंडी ने अस्पतालों को लेकर भी सवाल उठाया। उनका कहना था कि अस्पताल में मरीजों की समस्याओं को उठाना, खून की व्यवस्था, ऑपरेशन की जरूरत और डॉक्टरों की कमी जैसे मुद्दों को सामने लाना आम नागरिकों का अधिकार है। इसके लिए किसी व्यक्ति को बीजेपी के झंडे या गमछे के साथ विशेष अधिकार देने की जरूरत नहीं है।

उन्होंने कहा कि आम लोग अपनी सुरक्षा के लिए थाने जा सकते हैं और स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग के लिए अस्पताल जा सकते हैं। यह उनका संवैधानिक अधिकार है।

कांग्रेस नेता ने आगे आरोप लगाया कि पहले सीपीएम का शासन रहा और उसके बाद लंबे समय तक तृणमूल कांग्रेस की सरकार रही, लेकिन इस तरह की व्यवस्था पहले देखने को नहीं मिली। उनके मुताबिक, बीजेपी सत्ता में आने के बाद स्थानीय स्तर पर नए सिरे से नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रही है।


साइफनिंग और कथित वसूली पर भी उठे सवाल


प्रसंजीत पोइतूंडी ने बातचीत के दौरान कथित ‘साइफनिंग’ और वसूली से जुड़े आरोपों का भी जिक्र किया। उन्होंने कुछ लोगों के नाम लेते हुए बीजेपी नेतृत्व से सवाल किया कि कथित तौर पर ऊपर से जिम्मेदारी मिलने का क्या मतलब है।

उन्होंने बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व से कथित निर्देशों को स्पष्ट करने की मांग की और सवाल किया कि क्या ऐसे लोगों को पार्टी कार्यालय या वरिष्ठ नेताओं की ओर से कोई निर्देश मिला है।

हालांकि, ये सभी आरोप कांग्रेस नेता के राजनीतिक दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के आधार पर नहीं हुई है।


बीजेपी विधायक ने कहा- वायरल पत्र फर्जी


दूसरी ओर, आसनसोल नॉर्थ विधानसभा के बीजेपी विधायक कृषनेन्दु मुखर्जी ने वायरल पत्र को पूरी तरह फर्जी बताया है। उन्होंने कहा कि आसनसोल दक्षिण मंडल-1 के बीजेपी अध्यक्ष सोमनाथ मंडल को वह बेहद करीब से जानते हैं और उनके मुताबिक सोमनाथ मंडल ऐसा कोई काम नहीं कर सकते।

बीजेपी विधायक ने आरोप लगाया कि किसी ने सोमनाथ मंडल के नाम और पद का इस्तेमाल कर फर्जी पत्र तैयार किया है और सोशल मीडिया पर वायरल किया है। उनका कहना है कि इसका उद्देश्य एक मेहनती और समर्पित बीजेपी कार्यकर्ता को बदनाम करना तथा पार्टी की छवि खराब करना है।

कृषनेन्दु मुखर्जी ने कहा कि बीजेपी इस तरह की गतिविधियों को न तो करती है और न ही ऐसे कार्यों को बढ़ावा देती है। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी कार्यकर्ता और संगठन की छवि खराब करने के उद्देश्य से इस तरह की फर्जी सामग्री सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही है।


एक वायरल पत्र, कई सवाल


पूरे विवाद का केंद्र अब यही सवाल बन गया है कि सोशल मीडिया पर वायरल हुआ पत्र वास्तव में किसने जारी किया, क्या यह आधिकारिक दस्तावेज है या किसी ने बीजेपी मंडल अध्यक्ष के नाम और लेटरहेड का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया, 

एक तरफ कांग्रेस नेता इस पत्र को आधार बनाकर बीजेपी पर पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था में राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप लगा रहे हैं। दूसरी तरफ बीजेपी विधायक इसे फर्जी बताते हुए पार्टी और मंडल अध्यक्ष सोमनाथ मंडल को बदनाम करने की साजिश करार दे रहे हैं।

ऐसे में अब इस मामले में पत्र की वास्तविकता, उस पर लगी मुहर और हस्ताक्षर/प्राधिकरण की सत्यता की जांच अहम हो गई है। यदि पत्र फर्जी है, तो इसे तैयार करने और सोशल मीडिया पर प्रसारित करने वाले के खिलाफ कार्रवाई का सवाल उठेगा। वहीं यदि पत्र आधिकारिक पाया जाता है, तो थाना और अस्पताल से जुड़े प्रतिनिधियों की कथित नियुक्ति के अधिकार को लेकर गंभीर प्रशासनिक और राजनीतिक सवाल खड़े हो सकते हैं।

फिलहाल आसनसोल में वायरल पत्र को लेकर बीजेपी और विपक्ष आमने-सामने हैं और मामला लगातार राजनीतिक तूल पकड़ता जा रहा है।

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প্রধান সম্পাদক ও প্রকাশক, নির্ভীক বাংলা।

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